Thursday, December 27, 2012

Hindi..27-12-2012

murli in Hindi..27-12-2012-मुरली सार:- ''मीठे बच्चे - बाप को और चक्र को याद करो, मुख से कुछ भी बोलने की दरकार नहीं, सिर्फ इस
नर्क से दिल हटा दो तो तुम एवर निरोगी बन जायेंगे''

प्रश्न:- बाप डायरेक्ट आकर अपने बच्चों की श्रेष्ठ प्रालब्ध बनाने के लिए कौन सी राय देते हैं?
उत्तर:- बच्चे, अब तुम्हारा सब कुछ खत्म होने वाला है। कुछ भी काम नहीं आयेगा इसलिए सुदामे की तरह
अपनी भविष्य प्रालब्ध ब...ना लो। बाप डायरेक्ट आया है तो अपना सब कुछ सफल कर लो। हॉस्पिटल कम
कॉलेज खोल दो जिससे बहुतों का कल्याण हो। सबको रास्ता बताओ। श्रीमत पर सदा चलते रहो।

धारणा के लिए मुख्य सार:-

1) इस अन्तिम जन्म में सम्पूर्ण पवित्र बन बाप की याद में ही रहना है। इस पतित दुनिया से दिल हटा देना है।

2) स्वदर्शन चक्रधारी बनना है। हॉस्पिटल कम कॉलेज खोल अनेकों का कल्याण करना है। हर कदम पर
सुप्रीम सर्जन से श्रीमत लेनी है।

वरदान:- चारों ही सबजेक्ट को अपने स्वरूप में लाने वाले विश्व कल्याणकारी भव

पढ़ाई की जो चार सबजेक्ट हैं, उन सबका एक दो के साथ सम्बन्ध है। जो ज्ञानी तू आत्मा है, वह योगी तू
आत्मा भी अवश्य होगा और जिसने ज्ञान-योग को अपनी नेचर बना लिया उसके कर्म नेचुरल युक्तियुक्त वा
श्रेष्ठ होंगे। स्वभाव - संस्कार धारणा स्वरूप होंगे। जिनके पास इन तीनों सबजेक्ट की अनुभूतियों का खजाना है
वह मास्टर दाता अर्थात् सेवाधारी स्वत: बन जाते हैं। जो इन चारों सबजेक्ट में नम्बरवन लेते हैं उन्हें ही
कहा जाता है विश्व कल्याणकारी।

स्लोगन:- ज्ञान-योग को अपनी नेचर बनाओ तो कर्म नेचुरल श्रेष्ठ और युक्तियुक्त होंगे।

 

hindi 0f-26-12-2012-

muli in hindi 0f-26-12-2012-
मुरली सार:- ''मीठे बच्चे - तुम्हें लौकिक अलौकिक परिवार से तोड़ निभाना है, लेकिन किसी में भी मोह नहीं रखना है, मोह जीत बनना है''

प्रश्न:- कयामत का यह समय है, इसलिए बाप की कौनसी श्रेष्ठ मत सबको सुनाते रहो?
उत्तर:- बाप की श्रेष्ठ मत सुनाओ कि कयामत के पहले अपने पापों का हिसाब-किताब चुक्तू कर लो। अपना भविष्य श्रेष्ठ बनाने के लिए बाप पर पूरा-पूरा बलिहार जाओ। ...कयामत के पहले ज्ञान और योग से मुक्ति-जीवनमुक्ति का वर्सा ले लो। सारा पुरुषार्थ अभी ही करना है। बाप पर सब कुछ बलिहार करेंगे तो 21 जन्म के लिए मिल जायेगा। बाप का बनकर हर कदम पर डायरेक्शन लेते रहो।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) ड्रामा के पट्टे पर मजबूत रहना है। किसी भी बात में नाराज़ नहीं होना है। सदा राज़ी रहना है।
2) एक दो को सावधान कर उन्नति को पाना है। धन्धा आदि करते भी बाप की याद में रहने का पुरुषार्थ करना है।
वरदान:- परमात्म प्यार में धरती की आकर्षण से ऊपर उड़ने वाले मायाप्रूफ भव.

परमात्म प्यार धरनी की आकर्षण से ऊपर उड़ने का साधन है। जो धरनी अर्थात् देह-अभिमान की आकर्षण से ऊपर रहते हैं उन्हें माया अपनी ओर खींच नहीं सकती। कितना भी कोई आकर्षित रूप हो लेकिन माया की आकर्षण आप उड़ती कला वालों के पास पहुंच नहीं सकती। जैसे राकेट धरनी की आकर्षण से परे हो जाता है। ऐसे आप भी परे हो जाओ, इसकी विधि है न्यारा बनना वा एक बाप के प्यार में समाये रहना-इससे मायाप्रूफ बन जायेंगे।

स्लोगन:- स्व स्थिति को ऐसा शक्तिशाली बनाओ जो परिस्थितियां उसे नीचे ऊपर न कर सकें।

 

Tuesday, December 25, 2012

06‐12‐12

06‐12‐12 रात:मरली ु ओम ्शाÛत ''बापदादा'' मधबनु
मरली ु सार:- ''मीठे बÍचे - तàहु Ʌ िशव जयिÛत का ×योहार बड़ी धमधाम ू से मनाना है। यह तàहार ु े िलए
बहुत बड़ा खशी ु का िदन है, सबको बाप का पिरचय देना है''
रæन:- कौन से बÍचे अपना बहुत बड़ा नकसान ु करते हɇ? घाटा कब पड़ता है?
उ×तर:- जो बÍचे चलत-ेचलते पढ़ाई छोड़ देते हɇ, वे अपना बहुत बड़ा नकसान ु करते हɇ। बाबा
रोज़ इतने हीरे र×न देते हɇ, गéयु Üवाइंटस सनात ु े हɇ, ...अगर कोई रेगलर ु नहीं सनतु े हɇतो घाटा
पड़ जाता है। नापास हो जाते हɇ, èवग् की ऊं ची बादशाही गवा ं देते हɇ। पद रçट हो जाता है।
गीत:- रात के राही थक मत जाना......
Video song: http://www.youtube.com/watch?v=qTmzjkAhtFw
धारणा के िलए म्यु सार:-
1) इस परानु े शरीर का Įगार ंृ नहीं करना है। वनवाह मɅ रह नये घर मɅ चलने की तयारी ै करनी
है।
2) ञान èनान रोज़ करना है। कभी भी पढ़ाई िमस नहीं करनी है।
वरदान:- सगमय ं गु पर सदा र×यष वा ताजा फल खाने वाले शि्तशाली वा तÛदǾèत भव
सगमय ं गु की ही िवशषता े हैजो एक की पदमगणा ु रािÜत होती हैऔर र×यषफल भी िमलता
है। अभी-अभी सेवा की और अभी-अभी खशी ु Ǿपी फल िमला। तो जो र×यषफल अथात् ्ताजा
रूट खाने वाले हɇवह शि्तशाली वा तÛदǾèत होते हɇ। कोई कमजोरी उनके पास आ नहीं
सकती। कमजोरी तब आती है जब अलबेले होकर कुàभकरण की नीदं मɅ सो जाते हो। अलट्
रहो तो सव् शि्तयां साथ रहɅगी और सदा तÛदǾèत रहɅगे।
èलोगन:- फालो एक रéमा बाप को करो बाकी सबसेगणु रहण करो।

[07-12-2012]

[07-12-2012]

मुरली सार:- ''मीठे बच्चे - तुम्हें अभी ज्ञान का तीसरा नेत्र मिला है, तुम जानते हो हर 5 हजार वर्ष बाद भोलानाथ बाप द्वारा हम यह ज्ञान सुनकर मनुष्य से देवता बनते हैं''
प्रश्न:- ज्ञान की धारणा न होने का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर:- बुद्धि भटकती है, एक के साथ पूरा योग नहीं है। देही-अभिमानी नहीं बने हैं इसलिए धारणा नहीं होती है। बाबा कहते बच्चे, फैमिलियरटी में नहीं आओ। एक दो के नाम-रूप को म...त याद करो। एक बाप दूसरा न कोई - यह पाठ पक्का कर लो, दूसरों के पिछाड़ी न पड़ो। बाप से राय लेते रहो, इससे तुम दु:ख से लिबरेट हो जायेंगे। धारणा भी अच्छी होगी।
गीत:- भोलेनाथ से निराला....
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) बाप समान ज्ञान की शंख ध्वनि करनी है। सिर्फ पढ़ करके नहीं सुनाना है। धारणा करके फिर समझाना है।
2) खान-पान की बहुत परहेज रखनी है। श्रीमत का पालन कर प्रवृत्ति में रहते हुए कैसे पवित्र रहते हैं, यह अनुभव दूसरों को सुनाना है।
वरदान:- परमात्म प्यार और अधिकार की अलौकिक खुशी वा नशे में रहने वाले सर्व प्राप्ति सम्पन्न भव
जो बच्चे बाप के साथ सदा कम्बाइन्ड रह, प्यार से कहते हैं 'मेरा बाबा' तो उन्हें परमात्म अधिकार प्राप्त हो जाता है। बेहद का दाता सर्व प्राप्तियों से सम्पन्न कर देता है। तीनों लोकों के अधिकारी बन जाते हैं। फिर यही गीत गाते कि पाना था वह पा लिया, अभी कुछ पाने को नहीं रहा। उन्हें 21 जन्मों का गैरन्टी कार्ड मिल जाता है। तो इसी अलौकिक खुशी और नशे में रहो कि सब कुछ मिल गया।
स्लोगन:- साधनों के आधार पर साधना न हो। साधन, साधना में विघ्न रूप न बनें।

[08-12-2012]

[08-12-2012]

मुरली सार:- ''मीठे बच्चे - बेहद के बाप से तुम बहुत ऊंची पढ़ाई पढ़ रहे हो, बुद्धि में है पतित-पावन गॉड फादर के हम स्टूडेन्ट हैं, नई दुनिया के लिए पढ़ रहे हैं''
प्रश्न:- रूहानी गवर्मेन्ट से इज़ाफ़ा किन बच्चों को मिलता है?
उत्तर:- जो बहुतों को आप समान बनाने की मेहनत करते हैं। सर्विस का सबूत निकालते हैं उन्हें रूहानी गवर्मेन्ट बहुत बड़ा इज़ाफ़ा देती है। वह भविष्य 21 जन्मों के लिए ऊंच पद के अ...धिकारी बनते हैं।
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) पढ़ाई का बहुत कदर रखना है। बाप से कृपा आदि नहीं मांगनी है। ज्ञान और योगबल जमा करना है।
2) रहमदिल बनना है। मुख से कभी कड़ुवे बोल नहीं बोलने हैं। सदा मीठा बोलना है। आप समान बनाने की सेवा जरूर करनी है।
वरदान:- कल्याणकारी समय की स्मृति से अपने भविष्य को जानने वाले मास्टर त्रिकालदर्शी भव
यदि आपसे कोई पूछे कि आपका भविष्य क्या है? तो बोलो हमको पता है-बहुत अच्छा है क्योंकि हम जानते हैं कि कल जो होगा वह बहुत अच्छा होगा। जो हो गया वो भी अच्छा, जो हो रहा है वह और अच्छा और जो होने वाला है वह और बहुत अच्छा। जो मास्टर त्रिकालदर्शी बच्चे हैं उन्हें निश्चय रहता कि कल्याणकारी समय है, बाप हमारा कल्याणकारी है और हम विश्व कल्याणकारी हैं तो हमारा अकल्याण हो नहीं सकता।
स्लोगन:- समाप्ति के समय को समीप लाना है तो सम्पूर्ण बनने का पुरूषार्थ करो।
 
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रिवाइज:15-10-75 मधुबन

09-12-12 प्रात:मुरली ओम् शान्ति ''अव्यक्त-बापदादा'' रिवाइज:15-10-75 मधुबन

आत्म-घाती महापापी न बनकर डबल अहिंसक बनने की युक्तियाँ

वरदान:- मालिकपन की स्मृति से शक्तियों को आर्डर प्रमाण चलाने वाले स्वराज्य अधिकारी भव
बाप द्वारा जो भी शक्तियाँ मिली हैं उन सर्व शक्तियों को कार्य में लगाओ। समय पर शक्तियों को यूज़ करो। सिर्फ मालिकपन की स्मृति में रहकर फिर आर्डर करो तो शक्तियां आपका आर्डर मानेंगी। अगर कमजोर होकर आर्डर करेंगे तो नहीं मानेंगी। बापदादा सभी बच्चों को मालिक बनाते हैं, कमजोर नहीं। सब बच्चे राजा बच्चे हैं क्योंकि स्वराज्य आपका बर्थ राइट है। यह बर्थ-राइट कोई भी छीन नहीं सकता।

स्लोगन:- त्रिकालदर्शी स्थिति में स्थित रहकर हर कर्म करो तो सफलता मिलती रहेगी।

10-12-12 Hindi:

Today Murli ( God's Word For Today ) - 10-12-12 Hindi:

मुरली सार:- "मीठे बच्चे - कोई कितना भी गुणवान हो, मीठा हो, धनवान हो तुम्हें उसकी तरफ आकर्षित नहीं होना है, जिस्म को याद नहीं करना है"

प्रश्न:- जिन बच्चों को नॉलेज मिली है उनके मुख से बाप के प्रति कौन से मीठे बोल निकलते हैं?
उत्तर:- ओहो! बाबा आपने तो हमें जीयदान दे दिया। मीठे बाबा आपने हमें सृष्टि के आदि-मध्य-अन्त की नॉलेज देकर, सर्व दु:खों स...े छुड़ा दिया तो कितनी शुक्रिया निकलनी चाहिए।

प्रश्न:- अन्त के समय बाप के सिवाए किसी में भी रग न जाए उसके लिए क्या करना है?
उत्तर:- बाबा कहे बच्चे - कोई भी चीज़ लोभ के वश अपने पास एक्स्ट्रा नहीं रखनी है। एक्स्ट्रा रखेंगे तो उसमें रग जायेगी। बाप की याद भूल जायेगी।

गीत:- धीरज धर मनुवा.....

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) ज्ञान-योग से सबको मदद करनी है। डबल अहिंसक बनना है। किसी को भी दु:ख नहीं देना है।
2) नष्टोमोहा बनना है। किसी भी चीज़ में बुद्धि की रग नहीं रखनी है। एक बाप की याद सदा रहे- इसकी प्रैक्टिस करनी है।

वरदान:- श्रेष्ठ संस्कारों के आधार पर भविष्य संसार बनाने वाले धारणा स्वरूप भव
अभी के श्रेष्ठ संस्कारों से ही भविष्य संसार बनेगा। एक राज्य, एक धर्म के संस्कार ही भविष्य संसार का फाउण्डेशन हैं। स्वराज्य का धर्म वा धारणा है - मन-वचन-कर्म, सम्बन्ध-सम्पर्क में सब प्रकार की पवित्रता। संकल्प वा स्वप्न मात्र भी अपवित्रता अर्थात् दूसरा धर्म न हो। जहाँ पवित्रता है वहाँ अपवित्रता अर्थात् व्यर्थ वा विकल्प का नामनिशान नहीं रहता, उन्हें ही धारणा स्वरूप कहा जाता है।

स्लोगन:- दृढ़ता की शक्ति कड़े संस्कारों को भी मोम की तरह पिघला देती है।